Tuesday, 12 September 2017

राहुल गांधी का बर्कले यूनिवर्सिटी में जबरदस्त-लाजवाब-शानदार संबोधन

नमस्कार दोस्तो, आज लंबे अंतराल के बाद नये लेख के साथ हाजिर हूं। आज का लेख राहुल गांधी के संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के दौरे पर है। राहुल गांधी ओवरसीज कांग्रेस के प्रतिनिधि सैम पित्रोडा के आह्वान पर अमेरिका मे गये हैं और आज सुबह बर्कले यूनिवर्सिटी के प्रांगण मे दिये भाषण ने राहुल गांधी की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत नेता के रूप मे स्थापित कर दिया। 



बर्कले यूनिवर्सिटी मे राहुल गांधी का भाषण चलता रहा और भारत मे बैठे बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा भाषण को सुनकर अचंभित होते रहे और धडाधड राहुल गांधी के खिलाफ ट्वीट करते रहे। जिस प्रकार से संबित पात्रा राहुल गांधी को कोई खास तवज्जो ना देने की बात डिबेट मे कहते सुनाई देते हैं आज वो राहुल गांधी के भाषण को सुन खुद पर पड रहे थपेड़ों का अहसास कर रहे थे लेकिन बता रहे थे कि भारत को थपेड़े मार रहे हैं लेकिन दोस्तो आप सबको मालूम ही होगा कि राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी जी की तरां अपने संबोधन मे कोई ऐसी बात नही की कि उससे भारत की छवि को कोई क्षति पहुंचे। क्षति पहुंचने की बात से एक वाक्या याद आ गया कि नरेंद्र मोदी ने जापान मे अप्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुये कहा था कि "आप लोगों को 2014 से पहले खुद को भारतीय कहते हुये शर्म आती होगी लेकिन आप आज फख्र से कहते होंगे कि हम भारतीय हैं।"


उस वक्त नरेंद्र मोदी ने देश की इज्जत के साथ खिलवाड़ किया था नरेंद्र मोदी ने अपनी राजनीतिक दुश्मनी को देश से ऊपर रखते हुये पूर्ववर्ती सरकारों के सम्मान को धक्का पहुंचाने के इरादे से देश मे पैदा होने पर ही शर्मिंदगी वाला बयान दिया था।




अब हम पिछली बीत चुकी बातों को पीछे छोडते हुये राहुल गांधी के बर्कले यूनिवर्सिटी के प्रांगण मे दिये गये संबोधन की विशेष झलकियों के संग पूरे देशवासियों को राहुल गांधी के संबोधन से रूबरू करवायेंगे।

1: अहिंसा के विचार ने ही भारत के लोगों को आगे आने मे मदद की है।
2: नोटबंदी और जल्दबाजी में जीएसटी लागू करने से देश की अर्थव्यवस्था को खतरा पैदा हो गया है।
3: संसद को अंधेरे मे रखकर की गई नोटबंदी।
4: पीएम की जिम्मेदारी लेने को तैयार, पार्टी कहेगी तो जिम्मेदारी लूंगा।
5: सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने वाली ताकतें देश में मजबूत हो रही हैं।
6: जब हम सत्ता मे आये थे तो कश्मीर में बड़े पैमाने पर आंतकवाद था हमने इसे खत्म कर शांति स्थापित की थी, आज फिर आंतकवाद शुरू हो गया है।
7: हमने कश्मीर में महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जोडा, युवाओं को रोजगार प्रदान किये।
8: परिवारवाद पर निशाना न साधें, हमारा देश इसी तरह काम करता है।
9: मोदी के पास कई खूबियां, वो एक अच्छे वक्ता हैं, मुझसे भी बेहतर वक्ता हैं।
10: 2012 तक आते-आते हमारी पार्टी मे अंहकार आ गया था।

राहुल गांधी के संबोधन की कुछ मुख्य पंक्तियां हमने आपके सामने रखी इनके संबोधन की पंक्तियों को पढकर देखियेगा इन पंक्तियों मे आपको कहीं अंहकार की अनुभूति नही होगी क्यूंकि ये शख्स कुछ ऐसा ही लाजवाब सा है।
राहुल गांधी के भाषण की खास बात ये भी रही कि राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुये भारतीय राजनीति मे घृणा की राजनीति को दूर करने की कोशिश भी की। राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुये कहा कि वे जानते हैं कि भीड में तीन-चार प्रकार के मौजूद समूहों तक अपनी आवाज को कैसे पहुंचाया जाये लेकिन नरेंद्र मोदी बीजेपी के नेताओं की भी नही सुनते वे एक प्रकार से तानाशाह जैसे हैं। राहुल गांधी ने स्वच्छ भारत अभियान की प्रशंसा करते हुये कहा कि स्वच्छ भारत एक अच्छा आईडिया है हमारे वक्त मे निर्मल भारत से प्रेरित है जो मुझे भी पसंद है।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन मे कहा कि मैंने हमारे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी, पी• चिदंबरम और जयराम रमेश के साथ मिलकर कश्मीर मे शांति बहाली के लिये मिलकर काम किया और शांति बहाली होने के बाद 2013 मे मनमोहन सिंह को गले लगा कर कहा कि आपकी सबसे बडी सफलता कश्मीर से आंतकवाद को कम करना है। लेकिन हमने कभी बड़े-बड़े भाषण नही दिये, ढोल-नगाडे नही पीटे। हमने कश्मीर मे आवाम का दिल जीतने के लिये स्थानीय स्तर पर बात की और कश्मीर मे हमने एंटी इंडिया की सोच को खत्म करके पंचायती राज कायम किया।

राहुल गांधी ने बर्कले यूनिवर्सिटी मे अपने संबोधन मे नरेंद्र मोदी की विदेशनीति व कूटनीतिक चाल को घेरते हुये कहा कि आज रूस पाकिस्तान को हथियार बेच रहा है जो पहले कभी भी नही था। नेपाल, बर्मा, श्रीलंका, मालदीव मे चीन का दबदबा बढ रहा है विदेशनीति तितर-बितर हो चुकी है विदेशनीति मे बैंलेस बिठाना जरूरी है। अमेरिका के साथ दोस्ती जरूरी है लेकिन दूसरे देशों के संग रिश्तों मे सामंजस्य बिठाना भी जरूरी है।
इस प्रकार से राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी सरकार के प्रति नर्मी बरतते हुये एक कुठाराघात की तरफ बढते गये। राहुल गांधी नरेंद्र मोदी सरकार की कूटनीति को सवालों मे घेरते हुये देश को आगाह कर गये कि सिर्फ एक देश को खुश करने से पूरे विश्व के देशों के संग कूटनीतिक संबंध मजबूत नही होंगे। राहुल गांधी ने कहा कि सभी देशों के संग कूटनीतिक संबंधों मे सामंजस्य बिठाना होगा।

राहुल गांधी ने इस संबोधन मे एक अंहकार से दूर खुद को घेरे मे लेकर खुद की कमियों को भी पूरे विश्व के सामने उजागर करते हुये कहा कि 2012 आते-आते हमारी पार्टी मे अंहकार आ गया था जिसका खामियाजा हमने चुनावों मे भुगता।
राहुल गांधी ने इस संबोधन मे बीजेपी द्वारा उनकी छवि को खराब करने के लिये चलाये जा रहे सोशल-मीडिया अभियान को बयान करते हुये कहा कि हजार के लगभग कुछ पेड लोग मेरी छवि को खराब करने मे जुटे हैं।
राहुल गांधी की शख्सियत को बर्कले यूनिवर्सिटी मे संबोधित करता देख कुछ पंक्तियां उभर रही हैं वो सब आपके बीच रख रहा हूं।

"रखी बात उसने दिल से अपने, ना दिखलाये भाषण मे कभी सपने, खुद की कमी को भी उठाया है, विरोधी के अच्छे काम को भी सराहा है, जैसे-जैसे बीत रहा है वक्त तोल-मोल करके देख लेना क्या खोया-क्या पाया है, शांति की अपील लेकर वो निकला है उसने पाठ खड़ अमेरिका मे मंच पर शांति का पढाया है, घेरने लगे हैं विरोधी उसको पर वो क्या जाने ये शख्स लाजबाब सा शांति का प्राय है, मंजिल की नही है ललक उसमे उसको मंजिल की तरफ बढते को मिल रहा जो गिरा शख्स उस शख्स को उसने अपना समझ दे सहारा उठाया है, मजबूत बनाने की ललक है उसमे हर आम जन को इसीलिये रह सत्ता मे हर आम जन को सूचना का अधिकार दिलाया है"


बस इन्हीं अंतिम पंक्तियों के संग विदा लेता हूं आप सबसे।

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