Tuesday, 13 June 2017

सोनिया गांधी: त्याग की मूर्त, देश के प्रति समर्पित सूरत

दोस्तो, आज नये लेख के साथ आप सबकी अदालत मे हाजिर हूं। आज लेख उस महिला के नाम है जो पराये देश मे आकर उस देश के प्रति समर्पित होकर उसी देश की होकर रह गई।

सोनिया गांधी जी इस वक्त कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्षा हैं, और सोनिया गांधी जी ने राष्ट्रीय अध्यक्षा रहते हुये भी 2004 मे प्रधानमन्त्री पद को ठुकरा दिया और मनमोहन सिंह जी को उस पद पर बिठाया।

कुछ राजनीतिक आलोचक उसे प्रियंका और राहुल के दबाव के कारण ठुकराना कह रहे थे और कुछ आलोचक सोनिया जी को सुषमा जी का वो बयान याद आना बता रहे थे जिसमे सुषमा जी ने कहा था कि अगर सोनिया गांधी प्रधानमन्त्री बनी तो वो अपने बाल मुंडवा लेंगी।

दोस्तो, मैं याद दिलाना चाहता हूं आप सबको कि जब 2009 के बाद सोशल-मीडिया का दौर शुरू हुआ तो एक तरां से संघी विचारधारा सोशल-मीडिया पर हावी हो गई और आप सभी जानते ही हो कि व्यक्तिगत हमले कर सोनिया जी को कभी विदेशी, कभी कुछ और कभी अभद्रता की हदों को पार करने वाली भाषा का उपयोग किया जाने लगा लेकिन मैं सबके सामने रखूंगा कि सोनिया गांधी जी इटली की थी लेकिन वो भारत मे आकर भारत की होकर रह गई।

सोनिया गांधी जी ने भारतीय संस्कृति को अपनाया और विदेशी संस्कृति को दुत्कारा। सोनिया गांधी जी विधवा होने के बाद भी भारत की होकर रही और भारतीय संस्कृति को ही अपना बना लिया। लेकिन जो लोग भारतीयता और भारतीय संस्कारों पर नौटंकी करते हैं उन्होंने शादीशुदा होते हुये भी अपनी पत्नी को छोडा हुआ है।

सोनिया गांधी जी त्याग की मूर्त हैं, सोनिया जी ने प्रधानमंत्री पद का त्याग किया और विश्व के सर्वश्रेष्ठ अर्थशास्त्री को प्रधानमंत्री बना भारत को विकासपथ पर आगे बढाया और उदाहरणस्वरूप भारत विश्व की तीसरी सबसे बडी अर्थव्यवस्था के रूप मे उभरकर सामने आया। सोशल-मीडिया पर सोनिया जी की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जाती थी लेकिन कभी उन लोगों ने ये समझने की कोशिश नही की कि सोनिया जी बेशक विदेशी हों लेकिन विधवा होने के बाद विदेशी संस्कृति की तरां नये जीवनसाथी की तलाश नही की ब्लकि वो भारतीय संस्कृति और भारतीयता को अपनाकर भारत की होकर रह गई। सोनिया गांधी जी ने कभी भारत की बुराई नही सोची, भारत के लिये एक सेे एक तकनीक लाने के लिये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बडे-बडे समझौते किये। सोनिया जी के समझौते किसी उद्योगपति के लिये नही थे उनके समझौते देश के प्रति समर्पित थे।
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"वो त्याग की मूर्त है, वो बदलते भारत की सूरत है, कुछ बिगाडने का कर रहे काम पा सत्ता इस मूर्त को, वो आ सत्ता मे फिर से बदलेगी भारत की सूरत को"

"त्याग दिया सत्ता को उसने हर बार, कभी नरसिम्हा कभी मनमोहन को इस मुल्क का बनाया सरदार, उसने नही सोचा खुद का सबकुछ दिया इस मुल्क पर वार, वो फिर लांछन लगाते इस त्याग की मूर्त पर, मगर वो नही जानते वो लगा रहे हैं दाग भारतीय संस्कृति की सूरत पर"

पंक्तिया सबकुछ बयां कर रही है, सत्ता का अगर लालच होता तो हर बार खुद प्रधानमंत्री बनती लेकिन वो त्याग की मूर्त बन त्याग करती रही।

सोनिया गांधी को बदनाम करने के लिये सोशल-मीडिया पर एक अभियान आज भी काम कर रहा है जिसके तहत आज भी अभद्रता की हदों को पार करते कमेंट किये जाते हैं, लेकिन वे मंदबुद्धिभक्त ये नही जानते कि सोनिया गांधी ने भारतीय संस्कृति को अपनाकर विधवा होने के बाद भी यहीं रही और गांधी परिवार की विरासत को संभाला, लेकिन कुछ लोग ऐसे निकले जिन्होंने ने शादीशुदा होने के बाद भी अपनी शादी को कबूल करने में वर्षों लग गये और फिर भी वो अपनी पत्नी को अपना भी नही पाये सिर्फ कागजों मे पत्नी को पत्नी माना।

और सबसे ज्यादा आश्चर्य की बात ये है कि वे ही लोग सोनिया गांधी को विदेशी कह कोसते हैं और खुद को भारतीय संस्कृति को मानने वाले कहते हैं लेकिन मैं उन सबको बताना चाहूंगा कि भारतीय संस्कृति ये नही सिखाती कि शादीशुदा होते हुये अपनी पत्नी को त्याग कर रखा जाये, भारतीय संस्कृति सिखाती है कि विधवा होकर विधवा का जीवन जीते हुये सत्ता-सुख-सुविधा सब त्याग कर एक मिशाल पेश करना। सोनिया गांधी जी वही हैं जिन्होंने इतना दुख-दर्द झेलते हुये देश को आगे लेकर जाने की सोची।

सोनिया गांधी जी असल मायने मे त्याग की मूर्त है, सोनिया गांधी जी ने सत्ता-सुख को त्यागकर मनमोहन सिंह को सत्ता सौंप दी।

धन्यवाद दोस्तो, आज इस लेख को खत्म करते हुये आप सबसे विदा लेता हूं, फिर मिलूंगा नये लेख के साथ नये विचारों के साथ।
लेख कैसा लगा जरूर बताया कीजिये दोस्तो।

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