Sunday, 20 May 2018

राहुल गांधी: लोकतंत्र का रखवाला, हर देशवासी है उसका चाहने वाला।

मुझे गर्व है कि मैं उस पार्टी को समर्थन करता हूं जो हर बार लोकतंत्र की रखवाली करती है। लोकतंत्र मे लोगों का विश्वास कायम रखती है। मेरे काफी मित्र मेरे नेता सिर्फ मेरे ही नही पूरे देश के नेता राहुल गांधी जी को कोसते हैं अलग-अलग नामों से पुकारते हैं। बस मैं भी उनके नेता को थोडा उल्ट नाम से पुकार लेता हूं। मेरे पुकारने से उनको मिर्ची लग जाती है। लेकिन मैं आज छाती ठोक कर कह सकता हूं कि मेरा नेता सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि वो गलती मानना भी जानता है और मनवाना भी। जैसे आज येदियुरप्पा को मनवाया कि उसने कांग्रेस विधायको से बात की थी।


मुझे मेरे नेता मे बस एक बात खास लगती है कि वो गरीब की बात करता है, वो किसान की बात करता है, वो मध्यमवर्ग की बात करता है, वो शांति की बात करता है, वो गांधी जी की विचारधारा पर चलते रहने की बात करता है। आपको लग रहा होगा कि ये एक बात नही है। मगर ये एक ही बात है क्योंकि गरीब किसान से जुडा है किसान मध्यमवर्ग से और सभी शांतिपूर्ण माहौल मे रहना चाहते हैं और शांतिपूर्ण माहौल गांधीवादी विचारधारा पर चलते हुये ही दिया जा सकता है।

काफी लोग मजाक करते हैं और आगे भी करते रहेंगे। क्योंकि वो लोग देश के प्रति गंभीर नही हैं। उनको फर्जी चौकीदार का भाषण देना अच्छा लगता है, उनको फर्जी प्रधानसेवक का झूठ बोलना अच्छा लगता है, उनको परिधानमंत्री का व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का ज्ञान मंच से सुनाना अच्छा लगता है।

मेरा नेता मंच से देश के प्रति गंभीर मुद्दों को उठाते हुये सवाल परिधानमंत्री से करता है जो मेरे नेता का विपक्ष मे होते हुये देश के प्रति दायित्व भी बनता है। देश मे बढ़ रही बेरोजगारी, किसानों मे बढ रहे आत्महत्याओं के मामले, शिक्षा व्यवस्था व संवैधानिक संस्थाओं का होता संघीकरण, देश की कूटनीतिक तौर पर होती कमजोर नब्ज, देश खजाने को लग रहे कालेदीमक को सबके सामने लाना, नोटबंदी-जीएसटी से टूटती अर्थव्यवस्था इन सबको देश के सामने रखकर उन सब मुद्दों पर सरकार को दिशानिर्देशित करना।

अगर सही मायनों मे माना जाये तो विपक्ष सरकार को दिशा-निर्देशित करने का काम करता है। हालांकि वर्तमान सरकार की दिशा भटकी हुई है अभी तक अपनी दिशा पर नही लौट रही हवाईजहाज मे फ्लाईटमोड पर उड़ रही है बस कभी-कभार जमीन पर आती है वो भी चुनावी दौर मे।

आज कर्नाटक विधानसभा मे बीते वाकया ने लोकतंत्र को खत्म करने वाली ताकतों को जता दिया कि लोकतंत्र को ना डराया जा सकता है ना धमकाया जा सकता है ना खरीदा जा सकता है। लोकतंत्र को सिर्फ जीता जा सकता है वो भी जनमत हासिल करके जनसमर्थन पाकर।

बहुत से लोग कांग्रेस पर सवाल खडे करते हैं। उन सब सवालों का एक ही जवाब है वो जवाब है राहुल गांधी जी की शालीनता।
राहुल गांधी को बदनाम करने के लिये 2008 से ही कैंपेन चलाया जा रहा था उस कैंपेन का असर अब टूटता-खत्म होता नजर आ रहा है क्योंकि अब राहुल गांधी खुद को जनता का हितैषी, जन हितकारी साबित करते जा रहे हैं, दुश्मनों को अपनी शालीनता से धराशायी करते जा रहे हैं।

आक्रामक रवैया आपको खोखला कर देता है मगर शालीनता से पेश आना सब कटाक्षों को सहकर सहनशील बन विषम से विषम परिस्थितियों से निकलने के हौंसलों को मजबूत करता है। आक्रामक रवैया सिर्फ मजबूर कर सकता है विवश कर सकता है जैसा आपने आज कर्नाटक विधानसभा मे देखा भी। आक्रामक रवैया अपनाकर खरीदारी शुरू की गई मगर खरीदारी करने वाले भूल गये कि रेट बढा देने से या डरा देने से लोकतंत्र के रखवालों को खरीदा नही जा सकता।

आज का लम्हा मेरे समेत सभी कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को उत्साह से भरते हुये एक सीख दे गया। "बहुत मिलेंगे खरीदार, मगर कीमत अपनी अनमोल रखना, कांग्रेसी विचारधारा वाले बोल रखना, त्याग होने को सर को आगे खोल रखना, मगर झुकना मंजूर ना करना, कांग्रेस के लिये ही जीना कांग्रेस के लिये ही है मरना"

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