Monday, 19 June 2017

कांग्रेस की विकासगाथा: दिल्ली वाया हरियाणा वाया राजस्थान

दोस्तो, नया लेख लेकर हाजिर हूं आप लोगों के बीच। राहुल गांधी वो शख्स है जो सत्ता मे रहते हुये भी बिना हिचके गरीबों के बीच जाता रहा और उन गरीबों के दुख-दर्द को समझ सरकार की तरफ से उनके लिये प्रयत्न करता रहा और ये फूड सिक्योरिटी बिल का मकसद यही था कि हर भारतीय को खाने की चिन्ता ना रहे, हर भारतीय के लिये सस्ता अनाज मुहैया करवाना। गरीब लोगों को रोजगार की सुरक्षा देना मनरेगा के तहत था हालांकि नरेंद्र मोदी जी ने प्रधानमंत्री बनते ही मनरेगा को कांग्रेस की विफलताओं का स्मारक बताया था और बाद मे अपनी पलटूबाज की छवि के अनुसार मनरेगा जारी रखा और मनरेगा के तहत बजट भी बढाया था।
राहुल गांधी जी ही वो शख्स थे जिनके कारण जेल मे पडे अपराधी लोग चुनाव नही लड पाते। राहुल गांधी जी ने वो बिल फाडा था जिसमे अपराधियों को चुनाव लडने की छूट दी जा रही थी राहुल गांधी ने सत्ता दूर होने का रिस्क लेकर उस बिल को फाड दिया था जो अपराधियों को चुनाव लडने का अधिकार दे रहा था। बेशक ये बिल फाड़ने के बाद बीजेपी और कुछ अन्य दलों ने राहुल गांधी जी को जमकर घेरा था और इस बिल को फाड़ने के बाद राहुल की छवि धूमिल हुई और मीडिया पर ऐंटी-कांग्रेस ऐंटी-राहुल कैंपेन जोर पकड़ चुका था। लेकिन राहुल इतना सबकुछ हो जाने के बाद भी नही झुके और अपनी विचारधारा की राह पर चलते हुये उन्होंने विकास को तवज्जो दी।

दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान मे कांग्रेस सरकारों ने रहते हुये विकास कार्यो की रफ्तार बढा दी और दिल्ली को अंतरराष्ट्रीय स्तर का शहर बनाने मे कांग्रेस ने विशेष योगदान दिया और पूरी दिल्ली मे मेट्रो का जाल बिछा दिया, इतनी बडी दिल्ली को छोटी सी दिल्ली बना दिया के बाहरी छोर से गुडगांव जाने मे 3घंटे लगते थे वो सफर घट कर 50-55 मिनट का रह गया।rahul_gandhi
कांग्रेस की सरकार ने हरियाणा को उस दौर से साथ लेकर विकास की राह पर चलना शुरू किया जब हरियाणा मे विकास कार्य रूके पडे थे एक परिवार हरियाणा की अर्थव्यवस्था को निचोडकर सूखा बना चुका था।
हरियाणा मे कांग्रेस ने अपने राजनीति मे पीएचडी कहे जाने वाले दिग्गज नेता भजनलाल को दरकिनार करते हुये भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के रूप मे एक प्रयोग किया। ये प्रयोग कामयाब रहा और हरियाणा ने तरक्की की रफ्तार पकडनी शुरू करदी। हरियाणा कांग्रेस सरकार ने हरियाणा मे मेट्रो शुरू की और हरियाणा के किसानों को खुश करते हुये फसलों के मूल्य मे वृद्धि शुरू करदी और 85-90रूपये/क्विंटल बिकने वाले गन्ने के सरकारी रेट को 270-285रूपये/क्विंटल तक ले गई।

चौटाला सरकार (1999-2004) मे पाॅपुलर की पिट चुकी मार्किट को उठाने का काम भी हरियाणा सरकार ने किया। हरियाणा कांग्रेस सरकार ने हर वर्ग को ध्यान मे रखते हुये हर काम किया। हरियाणा कांग्रेस सरकार ने प्रति व्यक्ति आय मे वृद्धि दर्ज की।

हरियाणा कांग्रेस सरकार ने भूमि बिल पास कर केन्द्र को भेजा जिसके तहत किसानों को भूमि अधिग्रहण पर 3से4 गुणा रेट और 33 साल तक ठेका जो हर साल 1हजार वृद्धि के साथ भेजा।

हरियाणा की कांग्रेस सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र मे भी काफी विकास किया और हरियाणा मे उच्च स्तरीय शिक्षा को लेकर आये जिसके तहत आईआएम, सरकारी शिक्षण संस्थान और निजी शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रदान कर हरियाणा के छात्रों को पढाई मे ऑप्शन उपलब्ध करवाये गये।

हरियाणा कांग्रेस सरकार की खेल नीति के तहत ग्रामीण आंगन मे पले-बढे खिलाडी उभरकर सामने आये और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और प्रदेश का नाम चमकाया।

हरियाणा की खेलनीति के तहत ही पूरे भारत मे खिलाडीयों को सबसे ज्यादा नकद राशि पुरूस्कार दिया जाता है।
हरियाणा के बाद हम राजस्थान की तरफ चलते हैं, राजस्थान मे कांग्रेस ने पहले मुख्यमंत्री रह चुके सादगी के प्रतीक अशोक गहलोत को मुख्यमन्त्री बना उन्हे एक बार फिर से अधूरे रह चुके कार्य करने का मौका दिया।
अशोक गहलोत ने सत्ता मे आते ही काम करने शुरू कर दिये और राजस्थान कांग्रेस सरकार ने सरकारी हस्पतालों मे दवाई-इलाज मुफ्त करदिया, राजस्थान के पर्यटन को अभूतपूर्व बढावा मिला।
राजस्थान कांग्रेस सरकार ने राज्य को शांतिपूर्ण माहौल प्रदान किया। कांग्रेस सरकार ने राजस्थान की अलग ही पहचान बना दी थी। राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने जाते-जाते जयपुर मे मेट्रो की आधारशिला भी रख दी और आज जयपुर के लोग मेट्रो का लाभ उठा रही है।

कांग्रेस हमेशा विकास की राजनीति करती आई है और कांग्रेस ने कभी संप्रदायिक मुद्दों मे उलझाकर अपने वोटबैंक को बढाने का प्रयत्न नही किया, कांग्रेस को सत्ता से ज्यादा प्यारा देश है।

सत्ता आती-जाती रहती है लेकिन देश दिल मे बसता है, दिल मे बह रही देशभक्ति की भावना से ऊपर कभी सत्ता नही हो सकती, सत्ता पाने का मकसद सत्ता से लाभान्वित होना नही देश के लिये नीति-निर्माण करना है "योजना आयोग" नाम बदलकर "नीति आयोग" कर देना नीति-निर्माण नही है।

इसी के साथ दोस्तो विदा लेता हूं, दिल्ली और राजस्थान के बारे मे ज्यादा नही लिख पाया क्यूंकि मैं हरियाणा से हूं इसीलिये हरियाणा के बारे मे कुछ अधिक लिखा है।
अगले लेख के साथ फिर मिलेंगे, फिर से दिल के बयानों को एक लेख मे पिरोने की कोशिश करेंगे।

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